:
Breaking News

75 साल बाद पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार, शुभेंदु अधिकारी बनेंगे पहले BJP मुख्यमंत्री

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

पश्चिम बंगाल में 75 वर्षों बाद पहली बार भाजपा सरकार बनने जा रही है। शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। ममता बनर्जी को दो चुनावों में मात देने वाले शुभेंदु ने सामूहिक नेतृत्व और तेज प्रशासन का संकेत दिया है।

पश्चिम बंगाल की राजनीति ने आखिरकार वह दिन देख लिया जिसकी चर्चा वर्षों से होती रही थी। जिस धरती पर कभी जनसंघ ने अपनी शुरुआती राजनीतिक नींव रखी थी, उसी बंगाल में अब पहली बार भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने जा रही है। यह सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि राज्य की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ माना जा रहा है। भाजपा विधायक दल की बैठक के बाद यह साफ हो गया कि पार्टी के सबसे आक्रामक और प्रभावशाली चेहरे शुभेंदु अधिकारी राज्य के अगले मुख्यमंत्री होंगे।

करीब डेढ़ दशक तक बंगाल की राजनीति पर मजबूत पकड़ रखने वाली ममता बनर्जी को चुनौती देने वाले शुभेंदु अधिकारी ने कुछ ही वर्षों में खुद को भाजपा के सबसे बड़े बंगाली चेहरे के रूप में स्थापित कर लिया। 2021 में नंदीग्राम और फिर 2026 में भवानीपुर में ममता बनर्जी को हराने के बाद उनका राजनीतिक कद लगातार बढ़ता गया। अब मुख्यमंत्री पद की शपथ से पहले उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया है कि उनकी सरकार व्यक्तिगत नहीं बल्कि सामूहिक नेतृत्व के मॉडल पर काम करेगी।

कोलकाता के न्यू टाउन स्थित विश्व बांग्ला कन्वेंशन सेंटर में भाजपा विधायक दल की बैठक के बाद शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि सरकार संगठन आधारित सोच के साथ आगे बढ़ेगी। उन्होंने “मैं नहीं, हम” के मंत्र को सरकार की कार्यशैली का आधार बताया। राजनीतिक जानकार इसे भाजपा की उस रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं जिसमें पार्टी राज्य में संगठन को मजबूत करते हुए दीर्घकालिक राजनीतिक आधार तैयार करना चाहती है।

शुभेंदु अधिकारी का राजनीतिक सफर भी काफी दिलचस्प रहा है। पूर्व केंद्रीय मंत्री शिशिर अधिकारी के परिवार से आने वाले शुभेंदु लंबे समय तक तृणमूल कांग्रेस का हिस्सा रहे। उन्होंने कांग्रेस से राजनीति की शुरुआत की और फिर ममता बनर्जी के साथ तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए। परिवहन और सिंचाई मंत्री के रूप में उन्होंने राज्य सरकार में अहम जिम्मेदारियां संभालीं। लेकिन दिसंबर 2020 में उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया। इसके बाद बंगाल की राजनीति में समीकरण तेजी से बदलने लगे।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शुभेंदु अधिकारी का सबसे बड़ा राजनीतिक क्षण नंदीग्राम आंदोलन था। 2007-08 के दौरान जब वाम मोर्चा सरकार ने इंडोनेशिया के सलीम ग्रुप के विशेष आर्थिक क्षेत्र परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की, तब नंदीग्राम में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हुए। शुभेंदु इस आंदोलन का चेहरा बनकर उभरे। उस दौर में वाम सरकार के खिलाफ खुलकर आवाज उठाना आसान नहीं था, लेकिन नंदीग्राम आंदोलन ने बंगाल की राजनीति की दिशा ही बदल दी। 14 मार्च 2007 को हुई पुलिस फायरिंग में कई लोगों की मौत ने पूरे राज्य को झकझोर दिया और यहीं से वाम शासन के पतन की शुरुआत मानी गई।

अब मुख्यमंत्री बनने जा रहे शुभेंदु अधिकारी ने सत्ता संभालने से पहले ही कई बड़े संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में कथित संस्थागत भ्रष्टाचार की जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में आयोग बनाया जाएगा। संदेशखाली विवाद और आरजी कर मेडिकल कॉलेज मामले की जांच के लिए भी अलग आयोग गठित किए जाने की बात कही गई है। भाजपा इसे पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में बड़ा कदम बता रही है।

शुभेंदु अधिकारी ने स्वामी विवेकानंद के “चरैवेति” मंत्र को अपनी सरकार की सोच का आधार बताया। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य लगातार आगे बढ़ना और प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाना होगा। योजनाओं को समय पर लागू करने, निर्णय प्रक्रिया को तेज करने और केंद्र-राज्य समन्वय को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। उन्होंने साफ कहा कि बंगाल में लंबे समय से प्रशासनिक सुस्ती और देरी की शिकायतें रही हैं, जिन्हें खत्म करना उनकी प्राथमिकता होगी।

राजनीतिक दृष्टि से सबसे अहम दृश्य कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में देखने को मिलेगा, जहां पहली बार भाजपा सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित होगा। यह वही मैदान है जिसने दशकों तक बंगाल की राजनीति का उत्थान और पतन देखा है। कभी लाल झंडों से भरा रहने वाला यह मैदान अब भगवा राजनीति के नए अध्याय का साक्षी बनने जा रहा है।

ब्रिगेड परेड ग्राउंड का इतिहास बेहद समृद्ध रहा है। 1955 में सोवियत नेताओं निकिता ख्रुश्चेव और निकोलाई बुलगानिन की विशाल सभा से लेकर बांग्लादेश निर्माण के बाद इंदिरा गांधी और शेख मुजीबुर रहमान की ऐतिहासिक रैली तक, इस मैदान ने कई राजनीतिक युग देखे हैं। 1977 के बाद वाम मोर्चा की विशाल रैलियां इसी मैदान की पहचान बन गई थीं। फिर 2011 के बाद तृणमूल कांग्रेस ने इसे अपनी राजनीतिक ताकत का केंद्र बनाया। अब भाजपा यहां सत्ता का नया अध्याय लिखने जा रही है।

शपथ ग्रहण समारोह को बंगाल की संस्कृति से जोड़ने की भी तैयारी की गई है। रवींद्र जयंती के अवसर पर होने वाले इस समारोह में रवींद्र संगीत की विशेष प्रस्तुति होगी। बंगाली परंपरा के अनुसार कई नेता धोती-कुर्ता में नजर आ सकते हैं। मेहमानों के लिए झालमुड़ी, सीताभोग और मिहिदाना जैसे पारंपरिक बंगाली व्यंजनों की व्यवस्था की गई है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बंगाल में भाजपा सरकार का गठन राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण होगा। यह भाजपा के लिए वैचारिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बड़ी जीत मानी जा रही है। वहीं तृणमूल कांग्रेस के लिए यह सबसे कठिन राजनीतिक दौर माना जा रहा है।

अब पूरे देश की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री के रूप में बंगाल की राजनीति को किस दिशा में ले जाते हैं। भाजपा के लिए यह सिर्फ सत्ता हासिल करने का मौका नहीं, बल्कि बंगाल में स्थायी राजनीतिक आधार तैयार करने की सबसे बड़ी परीक्षा भी होगी।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *